Saturday, 27 January 2018

जीवन भाषा

मासूमियत,सरलता,दया,करुणा आदि
सारे अच्छे भाव प्रेम के सर्वनाम हैं

चालाकी,मक्कारी,हिंसा,घृणा आदि
सारे बुरे भाव स्वार्थ के सर्वनाम हैं

लोगों का एक -दूसरे के साथ बर्ताव
इन्हीं दो सर्वनामों की संज्ञाओं से प्रेरित क्रियाएं हैं

सुंदरता और शांति प्रेम के विशेषण हैं
और प्रसन्नता प्रेम का समानार्थी

जिसके विपर्यय स्वार्थ विशेष्य है
लोभ ईर्ष्या और अशांति का

इतना सरल है जीवन का व्याकरण
जिसने उतार लिया आचरण की भाषा में
इस बहुरूपिया संसार में वही रच सका
जीवन विषय पर सुख का महाकाव्य

Sunday, 21 January 2018

मन

अलगनी पर टंगे
रेशमी कोरे अंगोछे सा था मेरा मन
लोग आए स्वार्थ से सने हाथ पोंछे
और चल दिए
हर बार नमी के साथ
कुछ रेशे चिपक कर चले जाने से
तार-तार हो गये पटके को
सूती धागों की रफूग़री ने समेट तो लिया
लेकिन नरमियत थी
जो वापिस न लौटी
सुनो! तुमने इसे उतारकर
डाल तो लिया है अपने कांधे पर
लेकिन संभाल कर रखना
मेरे मन का बचा हुआ एक चौथाई रेशम
कि इससे ज़्यादा रुखाई में साँसें उलझती है मेरी

Sunday, 7 January 2018

क्यों न हम चलें..

सुनो न!
क्यों न हम चलें कहीं दूर
इतनी दूर कि जहाँ
यादें भी छू न पाएँ हमें

यादें...गुजरे कल की
बहुरूपिये समाज की
खोखली नैतिकताओं की
बेबजह वर्जनाओं की

यादें..रिश्तों-नातों की
जिन्हें थामे रहने की कोशिश में
फिसल गई डोर सपनों की
खो गयी राह खुशियों की

यादें..अपने अपनों की
जिनकी उपेक्षा मिट्टी डालती रही
प्रेम और अपनत्व की भूख से
दम तोड़ती भावनाओं पर

सुनो! क्यों न उपेक्षित हम
रौंदतें हुए सारी लक्ष्मण रेखाएं
पार करते हुए सारी दहलीजें
ठुकरा डालें ये ओछी दुनिया

हाँ, क्यों नहीं..चलो न
मूँद कर अपनी आँखें खो जाएँ एक दूसरे में
कि हमारे दिलों से बेहतर
हमारे लिए कोई और जगह नहीं

Thursday, 4 January 2018

मैं चाहती हूं

मैं चाहती हूँ
दिशाएँ रहें चुप और
सहेजे रहें सिर्फ तुम्हारी आवाज़

मैं चाहती हूँ
हवाएँ रहें शांत और
समेटे रहें सिर्फ तुम्हारी महक

मैं चाहती हूँ
बनी रहूँ अनछुई और
सजोये रहूँ सिर्फ तुम्हारा स्पर्श

मैं चाहती हूँ
ओढ़े रहूँ ख़्याल और
सजाती रहूँ सिर्फ तुम्हारे ख्बाब

मैं नहीं चाहती
तुम्हारे अहसास से अलग सोचूं कोई शब्द
तुम्हारा प्रेम लिखने के लिए भी।

कल आज और कल

आज जबकि महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते कल के लिए...