Monday, 5 February 2018

कि तुम मेरी ज़िंदगी हो..

मेरी गुलाबी हथेली पर रखे
तुम्हारे नीले-आसमानी सपने
सच होकर...लम्हा-लम्हा
उँगलियों की दरारों से फिसलकर
बैंगनी जुगनुओं में बदल जाते हैं
और टिमटिमाते हैं यादों के आसमान में

मेरी देह की लहरों पर उगा
तुम्हारी नज़र का सूरज
जब डूबता है मेरे अहसासों में
सिर्फ तभी साँस लेती है ज़िन्दगी
और हिलोर भरता है
मेरे का मन का समंदर

सुनो!भले कुछ न कहना मगर
कभी मद्धम लगे भावों की तरंग
या फीकी दिखे ख्बाबों की रंगत
तो तुम होठों से छू देना मेरी हथेली
और मैं आँखों से छू दूँगी तुम्हारा मन

कल आज और कल

आज जबकि महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते कल के लिए...