Saturday, 28 May 2022

कल आज और कल

आज जबकि
महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं
हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती
पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते

कल के लिए
तुमसे मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखती
न जाने किस पल तुम मुझसे विदा ले लो
भविष्य के लिए सिर्फ ये आशंका बची है

तो फिर 
बीता हुआ कल विश्वास जगाता है
गुजरे हुए लम्हे दिलासा देते हैं
मीठी यादें प्रेम की डोर टूटने नहीं देती

अच्छा ये तो कहो तुम्हें कैसे पता था कि
आने वाले दिन 
गुजरे दिनों की संजीवनी पर जिये जाएंगे
कि प्रेम का भविष्य नहीं सिर्फ अतीत होता है ।










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कल आज और कल

आज जबकि महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते कल के लिए...