दिन भर का थका-मांदा दिन
जब शाम के कांधे पे सिर टिकाता है
तो शाम निढाल सूरज को
अपने सितारों वाले आँचल में छुपा लेती है
चाँद चहलकदमी करता हुआ
आसमान का पहरेदार है
और चाँद के साथ तैनात हूँ मैं
अपने कुछ कीमती लम्हों की चौकीदारी में
यादों के कुछ कीमती सिक्के
जबकि रखे हुए हैं मन के सात तालों में
फिर भी रोज़ उलट-पलट कर देखती हूँ
कि कहीं कोई कम तो नहीं हुआ
तिल -तिल घटती रात
पल-पल उम्र खोती मुझमें
अपना रूप देखती है
काजल और कामना प्रेम और प्रतीक्षा
मेरी आँखें रात का आईना हैं