कोई तो रास्ता देखे किसी को याद आये
कोई तो शाम हो ऐसी कोई सहर आये
हमें कभी न जमाने के रंग ढंग आये
हर एक पेंच में उलझे हैं हर दफ़ा हारे
ज़िंदगी ज़िंदगी खेलके हम तंग आये
न रंग न खुशबू न उजालों की सिफ़त
किस उम्मीद में कोई हमारे संग आये
वो अपने जोग ज्ञान ध्यान से नहीं उबरा
कभी रंगरेज पे न ओढ़नी के रंग आये
नींद अक्सर ही आंसुओं से गीली रही
डर यही है के तेरे ख्बाब पे न जंग आये