मासूमियत,सरलता,दया,करुणा आदि
सारे अच्छे भाव प्रेम के सर्वनाम हैं
चालाकी,मक्कारी,हिंसा,घृणा आदि
सारे बुरे भाव स्वार्थ के सर्वनाम हैं
लोगों का एक -दूसरे के साथ बर्ताव
इन्हीं दो सर्वनामों की संज्ञाओं से प्रेरित क्रियाएं हैं
सुंदरता और शांति प्रेम के विशेषण हैं
और प्रसन्नता प्रेम का समानार्थी
जिसके विपर्यय स्वार्थ विशेष्य है
लोभ ईर्ष्या और अशांति का
इतना सरल है जीवन का व्याकरण
जिसने उतार लिया आचरण की भाषा में
इस बहुरूपिया संसार में वही रच सका
जीवन विषय पर सुख का महाकाव्य
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