Thursday, 4 January 2018

मैं चाहती हूं

मैं चाहती हूँ
दिशाएँ रहें चुप और
सहेजे रहें सिर्फ तुम्हारी आवाज़

मैं चाहती हूँ
हवाएँ रहें शांत और
समेटे रहें सिर्फ तुम्हारी महक

मैं चाहती हूँ
बनी रहूँ अनछुई और
सजोये रहूँ सिर्फ तुम्हारा स्पर्श

मैं चाहती हूँ
ओढ़े रहूँ ख़्याल और
सजाती रहूँ सिर्फ तुम्हारे ख्बाब

मैं नहीं चाहती
तुम्हारे अहसास से अलग सोचूं कोई शब्द
तुम्हारा प्रेम लिखने के लिए भी।

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