Saturday, 28 May 2022

कल आज और कल

आज जबकि
महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं
हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती
पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते

कल के लिए
तुमसे मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिखती
न जाने किस पल तुम मुझसे विदा ले लो
भविष्य के लिए सिर्फ ये आशंका बची है

तो फिर 
बीता हुआ कल विश्वास जगाता है
गुजरे हुए लम्हे दिलासा देते हैं
मीठी यादें प्रेम की डोर टूटने नहीं देती

अच्छा ये तो कहो तुम्हें कैसे पता था कि
आने वाले दिन 
गुजरे दिनों की संजीवनी पर जिये जाएंगे
कि प्रेम का भविष्य नहीं सिर्फ अतीत होता है ।










Saturday, 19 February 2022

मौसम बदल भी जाये
हर शाख नहीं हरयाती
कभी कहीं कम पड़ जाता है
पतझड़ की चोट पर वसंत का फाहा ।

खंडहरों में दिया जलाकर भी
उनमें प्राण नहीं लौटते
कि रोशनी अंधेरे तो मिटा देती है
वीरानगी नहीं।

ठंड को क्या उलाहना
कि जड़ कर दिया मन
पत्थर में बदलते देखता रहा
मुझे शिकायत प्रेम से है।

रतजगों से ही नहीं
कभी कभो नींद से भी बोझिल हो जाती हैं आँखें
अधूरे सपनों की किरंचें
उनींदेपन से ज़्यादा चुभती हैं ।

Saturday, 17 July 2021

चित्रकारी

एक लंबे अरसे बाद जब मैं 
पेंसिल रंग और ब्रश उठाउंगी
तो सबसे पहले संवारूंगी
अपने ही जीवन का चित्र 

जब मैं खुद बनूंगी चित्रकार
तो नहीं छोडूंगी 
अपनी हथेलियों के जैसी 
आड़ी -टेढ़ी और अधूरी लकीरें 

आजाद कर दूंगी
गहरी काली परिधियों में
बरसों से क़ैद रहे
अहसासों के सभी रंगों को

कुछ आसमानी बातें 
ज़मीन पर उकेरी जाएंगी
कुछ कड़वी सच्चाइयां 
समंदर के नीले हरे रंग में ढक दी जाएंगी

रेतीला भूरापन हटाकर
धरती पर गिराऊँगी
कुछ और धानी हरा रंग
सजाऊंगी कुछ और फूल तितलियां

मौसमों को तो मैं रहने दूँगी
ऐसे ही कच्चे रंगों में
कि अच्छी लगती है मुझे
एक के बाद एक आती जाती ऋतुएँ

लेकिन बहुत पक्के रंग से रंग दूँगी
इंसान और इंसानी रिश्ते
कि इनके रंग बदलने और रंग उतरने से
सबसे ज़्यादा बदरंग होती है ज़िन्दगी

Sunday, 17 January 2021

कोई तो रास्ता देखे किसी को याद आये
कोई तो शाम हो ऐसी कोई सहर आये

न सीखा झूठ न फरेब न ही पर्दादारी
हमें कभी न जमाने के रंग ढंग आये

हर एक पेंच में उलझे हैं हर दफ़ा हारे
ज़िंदगी ज़िंदगी खेलके हम तंग आये

न रंग न खुशबू न उजालों की सिफ़त
किस उम्मीद में कोई हमारे संग आये

वो अपने जोग ज्ञान ध्यान से नहीं उबरा
कभी रंगरेज पे न ओढ़नी के रंग आये

नींद अक्सर ही आंसुओं से गीली रही
डर यही है के तेरे ख्बाब पे न जंग आये

Tuesday, 19 May 2020

मेरा होना

मैं -
भीड़ होती
जिसमें छुप जाते तुम
जब बचना चाहते पहचाने जाने से..

होती एकांत
कि मेरी साँसे तक न टकराती
तुम्हारे विचारों की आवाजाही में..

हो सकती पुरवाई
कि जिसके साथ ऊंची बेसुरी आवाज़ में भी
गा सकते लड़कपन के गीत..

वो कोना होती
तकलीफों को कोसते हुए
जहाँ खुलकर रो पाते..

या होती
अपराधों और इच्छाओं की गवाह
मंदिर की आखिरी सीढ़ी..

काश! मैं 'मैं' न होकर
'वो' होती,जिसके होने से
खलल न पड़ता तुम्हारे 'तुम' होने में

Tuesday, 11 February 2020

प्रेम के वादे

हमसफ़र अब ये सफ़र कट जाएगा...

अपनी छोड़ सारी दुनिया की फ़िक्र करने वाले 
मेरे प्रेमी!
हमने प्रेम किया लेकिन कभी वादे क्यों न किये?

नाक पर झूठी गुस्सा और मन में नेह का ढेर लिए
मेरे साथी !
कोई वादा किये बिना भी बने रहोगे न मेरे साथ हमेशा ?

बात-बात में आँखें छलका देने वाले, नखरेबाज़
मेरे दोस्त !
कसमों की डोर के बिना भी जुड़ा रहेगा न ये बन्धन?

बेवज़ह झगड़ने और मेरा ख़्याल ओढ़कर सो जाने वाले
मेरे पगलू!
मैं जानती हूँ इन सवालों के लिए तुम्हारा जबाब
कि हमारे प्रेम को नहीं किसी एग्रीमेंट की ज़रूरत
फिर भी...
क्योंकि चलन है प्रेम में कसमों-वादों का 
इसलिए
आज मैं भी करती हूँ एक वादा कि मेरे होने तक
तुम्हारा दर्द मेरी आँखों में पढ़ा जाएगा
तुम्हारी खुशी मेरे होठों पे मुस्कुराएगी

मुझको मुझे भुला देने वाले और खुद मुझमें खो जाने वाले 
मेरे इश्क़,
सुनो न ! 
तुम भी करो मुझसे एक वादा
कि कोशिश करोगे तुम 
मैं हमेशा मुस्कुराती रहूँ
तुम्हारी आँखों में
अपने जीवन में
और
हम दोनों के ख़्वाबों में !

Sunday, 26 January 2020

तुम्हारा जाना

कितनी जल्दी ख़त्म हो जाता है
तुम्हारा आना

दिन पलों में गुजरते हैं
और यादों में बदल जाते हैं 
और जाना बदल जाता है
एक अनिश्चित इंतजार में

तुम्हें पता है ..
साँसे रह-रहकर उलझती थीं
तुम्हारे जाते हुए कदमों की आहट से

और मन इतना भारी
कि सम्भलता ही नहीं था बुझती सी धड़कनों से

आंखें न जाने कितनी देर अटकी रहीं उस मोड़ पर
जो अगर न होता तो कुछ पल और दिखाई देते तुम

सुनो !
प्रेम जब आत्मा का मिलन है
तो क्यों खिंचे चले जाते हैं प्राण 
तुम्हारी छूटती हथेलियों के साथ।

कल आज और कल

आज जबकि महीनों तुम्हें बिना देखे गुजर जाते हैं हफ्तों तुम्हारी आवाज़ नहीं सुनाई देती पहरों तुम्हारे पास मेरे लिए कोई शब्द नहीं होते कल के लिए...