कितनी जल्दी ख़त्म हो जाता है
तुम्हारा आना
दिन पलों में गुजरते हैं
और यादों में बदल जाते हैं
और जाना बदल जाता है
एक अनिश्चित इंतजार में
तुम्हें पता है ..
साँसे रह-रहकर उलझती थीं
तुम्हारे जाते हुए कदमों की आहट से
और मन इतना भारी
कि सम्भलता ही नहीं था बुझती सी धड़कनों से
आंखें न जाने कितनी देर अटकी रहीं उस मोड़ पर
जो अगर न होता तो कुछ पल और दिखाई देते तुम
सुनो !
प्रेम जब आत्मा का मिलन है
तो क्यों खिंचे चले जाते हैं प्राण
तुम्हारी छूटती हथेलियों के साथ।
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