Sunday, 26 January 2020

तुम्हारा जाना

कितनी जल्दी ख़त्म हो जाता है
तुम्हारा आना

दिन पलों में गुजरते हैं
और यादों में बदल जाते हैं 
और जाना बदल जाता है
एक अनिश्चित इंतजार में

तुम्हें पता है ..
साँसे रह-रहकर उलझती थीं
तुम्हारे जाते हुए कदमों की आहट से

और मन इतना भारी
कि सम्भलता ही नहीं था बुझती सी धड़कनों से

आंखें न जाने कितनी देर अटकी रहीं उस मोड़ पर
जो अगर न होता तो कुछ पल और दिखाई देते तुम

सुनो !
प्रेम जब आत्मा का मिलन है
तो क्यों खिंचे चले जाते हैं प्राण 
तुम्हारी छूटती हथेलियों के साथ।

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