हमसफ़र अब ये सफ़र कट जाएगा...
अपनी छोड़ सारी दुनिया की फ़िक्र करने वाले
मेरे प्रेमी!
हमने प्रेम किया लेकिन कभी वादे क्यों न किये?
नाक पर झूठी गुस्सा और मन में नेह का ढेर लिए
मेरे साथी !
कोई वादा किये बिना भी बने रहोगे न मेरे साथ हमेशा ?
बात-बात में आँखें छलका देने वाले, नखरेबाज़
मेरे दोस्त !
कसमों की डोर के बिना भी जुड़ा रहेगा न ये बन्धन?
बेवज़ह झगड़ने और मेरा ख़्याल ओढ़कर सो जाने वाले
मेरे पगलू!
मैं जानती हूँ इन सवालों के लिए तुम्हारा जबाब
कि हमारे प्रेम को नहीं किसी एग्रीमेंट की ज़रूरत
फिर भी...
क्योंकि चलन है प्रेम में कसमों-वादों का
इसलिए
आज मैं भी करती हूँ एक वादा कि मेरे होने तक
तुम्हारा दर्द मेरी आँखों में पढ़ा जाएगा
तुम्हारी खुशी मेरे होठों पे मुस्कुराएगी
मुझको मुझे भुला देने वाले और खुद मुझमें खो जाने वाले
मेरे इश्क़,
सुनो न !
तुम भी करो मुझसे एक वादा
कि कोशिश करोगे तुम
मैं हमेशा मुस्कुराती रहूँ
तुम्हारी आँखों में
अपने जीवन में
और
हम दोनों के ख़्वाबों में !
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