मेरी सीली मुस्कान खिलती रहे
तुम्हारे नज़र की धूप से..
शामें गुनगुनाती रहें
तुम्हारी बुनी नज़्मों की चादर में..
तुम चाहत के धागे से
रात के आंचल पर
टांकते रहो अपने अरमान
और मेरी पलकें उन्हें चुनती रहें
अपनी बेख्बाब नींदों के लिए..
रात-दिन का ये सफ़र
चलता रहे ऐसे ही..
प्यार हो हर बार हो
तुमसे ही..
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