Saturday, 23 December 2017

प्रेम कविता

तुम्हारी आँखों में जब
धूप सा चमकता है प्रेम
मेरे अंधियारे मन को
सुनहरा रंग देता है

तुम्हारी पलकों में जब
ओस सा छलकता है प्रेम
मेरे ओठों को छूकर
गुलाब कर देता है

तुम्हारी चाहतों को
अपने नेह में गूँथकर
मैंने बाँध लिया है
जीवनद्वार पर बंदनवार सा

अब मेरी हथेलियों पर रखी
तुम्हारी हथेलियों के बीच
बस प्रीत पनपेगी या फिर
अंकुरित होगी कविता

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