Tuesday, 7 November 2017

रंग

धरती और आसमान के बीच
रंगों का एक खेल है जीवन

पहली साँस के साथ
पहली आवाज के साथ
पहली बार खुली पलकों में
समा जाने वाली
सतरंगी किरन
आखिरी साँस तक
रंग भरती रहती है
ज़िन्दगी के लम्हों में

अच्छाइयों के उजले
बुराइयों के रंग गहरे
सुख के चमकीले
दुःख के धुंधले से

खुशियों के रंग धानी
उदासियों के नीले
सपनों के रंग सिंदूरी
उम्मीदों के पीले

हर अभाव का हर प्रभाव का
एक अलग रंग है
हर संवेदना का हर भाव का
एक अलग रंग है

उम्र ओढ़ती रहती है
अनगिनत रंगों की असंख्य परतें
धूप के इन्द्रधनुषी रंग एक दिन
आपस में उलझकर
अंधेरे के रंग में बदल जाते हैं

अमास की रात में
चाँद उगने जैसा अचरज था
इस स्याह सतह पर
किसी और रंग का उभरना
लेकिन मेरे मटमैले मन में
कुमुदनी से खिल उठे तुम

इसी तरह निर्मल निर्दोष
निश्छल बना रहे हमेशा इसलिए
सारे रंगों को धोकर छुआ है मैंने
रोशनी सा उजला तुम्हारा प्रेम

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