Friday, 22 September 2017

तुम्हारा साथ

मेरे साथ तुम्हारा होना..
जैसे ठिठुरती देह को सहलाती धूप
जैसे भभकती लौ को घेरे हथेलियाँ
जैसे थकान भरे दिन के बाद की नींद
या बन्द कमरे में खुला रोशनदान

तुम्हारे साथ मेरा होना..
जैसे फूल की पंखुड़ियों में उतरे रंग
जैसे हवा में घुली ख़स की महक
जैसे आसमान से किसी तारे का टूटना
और आसमान में ही खो जाना।

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