किताबों के बीच दबा दिए थे कुछ अहसास
थोड़ी सी उम्मीदें बचायी थी मखमली बटुए में
छत की मुडेर पर रख छोड़ी थी अपनी चहक
बारिश की बूंदों में सहेजी थी कुछ शैतानियां
गुलाबी रुमाल में काढ़ा था मौसमों का रेशम
गली के मोड़ पे उड़ गया था गालों का गुलाल...
निठुर,निरमोही समय..सुनो!
जीवन के जिन रास्तों पर
साथ लिए जा रहे हो मुझे
क्या इनका कोई छोर जाकर मिलेगा वहाँ
मेरी उम्र भर की अमानतें रखी हैं जहाँ
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