Thursday, 17 August 2017

दिशा

दूर-दूर तक विस्तरे
संसार सागर ने
खींच लिया था मुझे
अपने भीतर..

इसमें उगे
कानूनों के जंगल ने
भटका दिया था
पूरी तरह....

ढूढ़ कर मुझे
नए सिरे से
गढ़ा है तुमने
तुम्हारे स्पर्श ने
जीवित किया है
मुझको मुझमें

रची है मेरी साँसों में
आशाओं की खुशबू
जगाये है आँखों में स्वप्न
बुनी हैं हृदय में अभिलाषाएं

और देखो न!
इस नए जीवन-दान के
प्रतिदान में देने
कुछ भी नहीं मेरे पास

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