Saturday, 19 August 2017

कभी तो

वजहें कुछ भी रहें
तुम्हारे पास या मुझमें
रोक सकती हैं तुम्हें ,मुझे नहीं।
मैं तो अगर हूँ
तो रहोगे मुझमें तुम भी।

कसे तारों पे लगा लो सटीक तानें,
बहने दो लम्हे सुर में,
भीग लो मौसमों में अभी,
चमकने दो रातों को चाँदनी में,
रोशन रहने दो जीवन की दिवाली।

जन्म,उम्र,नैतिकता और सुंदरता 
के आयाम थक जाएंगे जहाँ
फिर से पूछूँगी तुमसे कि..
अब लिखोगे कुछ सितारे लेकर
अपने आसमान पर मेरा नाम ?

क्या अब तलाश लूँ तुम्हारे हाथों में
वो जगह जहाँ बांधे रहे मुझे ??
सिर रखकर सीने पर अब खोज लूँ
साँसों के सितार में अपने सुर?

सालों सहेजे सावन को क्या
अब उड़ेल दूँ तुम्हारे कंधे पर??
बन जाऊँ अँधेरा और चुन चुन
देती रहूँ गुजरे बीते चमकीले पल?

फिर से पूछूँगी तुमसे
चाहोगे मुझे अब???

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