न शर्म,न अवसाद,न दुश्चिंता का
न अँधेरे का,उदासी का, न कुंठा का
ये जो काला रंग हैं
दुनियां के हर रंग से
अलग,अनोखा,निराला..
ये रंग मिले जब
किसी दूसरे रंग से
तो बना दे उसे और गहरा..
और ज्यादा घुल जाए
तो रंग ले अपने ही रंग।
लेकिन इस पर
नही चढ़ता दूजे किसी
रंग का रंग।
क्यों तुम्हारा मनपसंद रंग भी तो यही है न??
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